AKHAND MISHRA

Add To collaction

अगर तुम साथ होते

हो ही जाते मुकम्मल सारे सपने मेरे

अगर तुम साथ होते..

कर जाता कुछ अलग ही अपनी दुनिया में 
अगर तुम साथ होते..

हर वक्त तुम्हारे चेहरे पर मुस्कुराहट लाने की  
जिम्मेदारी मेरी होती, अगर तुम साथ होते.. 
  
तुम्हारे हर दर्द में मैं दवा बनकर उभरता 
अगर तुम साथ होते..

दुनियादारी से अलग होती दास्तां हमारी 
अगर तुम साथ होते..   
 
जिंदगी का हर दिन मेरा तीज त्यौहारों सा होता
अगर तुम साथ होते..

ढूंढ लेता मैं गम में भी खुशियां 
अगर तुम साथ होते...

कर लेता ख्वाहिशें पूरी हर पल तुम्हें देखकर 
अगर तुम साथ होते..

हर दिन के एक एक पल कितने हसीन होते 
अगर तुम साथ होते..

उदासी का एक कतरा भी मेरे मन तलक ना पहुंचता 
अगर तुम साथ होते..
 
जिंदगी के फलसफों में अकेला ना होता 
अगर तुम साथ होते हैं..
 
मिल सकते इस जिंदगी में तुम मुझे उम्र भर के लिए,
सारी उम्र मैं तन्हा और अकेला ना होता 
अगर तुम साथ होते .. अगर तुम साथ होते..


संग्रह- "सिर्फ तुम"

____अखंड मिश्र 'एके'
       (स्वरचित एवं मौलिक)
         
(Note- Writing or Posting This Post Anywhere Without The Real Name Of The Author is Punishable Under The CopyRight Act 1957. All Rights Reserved.)


   9
4 Comments

Renu

27-Jan-2023 03:19 PM

👍👍🌺

Reply

AKHAND MISHRA

03-Feb-2023 12:20 PM

dhanyawaad

Reply

शानदार

Reply

AKHAND MISHRA

03-Feb-2023 12:20 PM

bahut abhaar aapka

Reply